भारतिय राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत


 "आजादी के बाद का भारत"का अध्य्यन करने के लिए राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत को जानना आवश्यक है क्योकि विकास की क्रांति में स्वतंत्रता आंदोलन की जड़े गहरी हैं।1919 के बाद राष्ट्रीय आंदोलन इस विचारधारा के इर्द गिर्द रहा की राजनीति या स्वयं की मुप्ति में आम जनता को शामिल होना चाहिये वरन होना पङेगा।स्वतंत्रता आंदोलन के प्रणेता महात्मा गांधी ने जीवन भर इसी विचारधारा का प्रसार किया कि चाहे सामाजिक क्रांति हो या फिर औपनिवेशिक शासन की जड़े कमजोर करने का जन अभियान हो उसे पूरा करने में  जनता की भूमिका अहम होती हैं न्रेतीत्व की नही तथापि न्रेतीत्व की गुणवत्ता इस प्रयोजन को ,प्रभावित करती है।

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