नीति

 नीति कहती है कि अगर धर्म की रक्षा के लिए झूठ बोलना अनिवार्य हो तो मनुष्य को झूठ बोल लेना चाहिए।उस समय झूठ बोलना नीति विरुद्ध नही होगा।

नीति कहता है कि अगर कोई आपके शरण मे आता है तो उसे ना न करे भले ही वह आपके गुप्त बातो का पता लगाने के इरादे से ही क्यो न आया हो।

छोटा भाई पुत्र के समान होता है व छोटे भाई की भार्या पुत्री के समान होती है।

जब विनास का समय आता है तो बुद्धि विपरीत हो जाती है।तुलसीदास जी ने भी लिखा है, "जाको प्रभु तरुण दुःख देहि।ताकि मति पहले हर लेहि।।

यदि मंत्री भय के कारण मिथ्या प्रसंशा करता हो तो समझ जाइए की राज्य का सर्वनाश होने वाला है।और यदि वैद्य भय के कारण असत्य बोल रहा है तो शरीर का नाश होना तय है।


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