चिंतन शक्ति को कैसे बढ़ाया जाय?

 सोचने की क्षमता बढ़ाना कौन नही चाहता पर इस विशष पर ईन्टरनेट पर कम ही जानकारी है तो चलिए दृष्टिपात करते है।

चिंतन करने से पहले हमें यह पता होना चहिये की सोचना क्या है फिर यह पता करना चाहिए कि क्या जो हमे सोचना  है क्या उसके समरूप कोई दूसरी दूसरा धारणा प्रकृति में उपस्थित है।जैसे यदि आप अद्वैत के बारे में सोच रहे हो तो इसका प्रकृति में सबसे अच्छा उदाहरण यह है कि ऊर्जा पदार्थ में व पदार्थ ऊर्जा में परिवर्तित हो सकता है।समरूप उदाहरण देने से आपका वक्तब्य या लेख आकर्षक हो जाता है।इसे पार्श्व विचार कहते है।

जब आप एक शब्द किसी को सुनाते हो तो उसे यह सामान्य लगता है पर जब आप उस शब्द के पीछे एक विशेषण लगा देते हो तो यह लोकप्रिय हो जायेगा जैसे क्रांति एक सामान्य सब्द है पर क्रमिक क्रांति उसके अपेक्षा असामान्य शब्द है।इसी प्रकार "गूढ़ ब्रह्माण्ड"ब्रह्माण्ड से ज्यादा असाधारण है।इसे विशेषण अलंकार कहा जा सकता है।

जब आप एक ही बात अन्य सब्दो व वाक्यो व विचारो में दुहराते हो या अलग अलग  दृष्टिकोण से समझाते हो तो यह भी सामने वाले श्रोता को प्रभावित करता है।इसे अर्थानुप्रास अलंकार कहा जा सकता है।

हा एक काम यह न करे कि जो सर्वसाधारण को जो बिना सर खपाये समझ आती हो ऐसी समाग्री को न बोले या लिखे।

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