कहानी गतिशील भारत की


 14अगस्त1947 आजादी के पूर्व सन्ध्या को प०नेहरू के प्रसिद्ध भाषण में अर्जुन रूपी राष्ट्र को दीये सम्बोधन में जो उत्साह था वह दुर्लभ था न भूतो न भविष्यति।नेहरू को इस यूरोपीय विचारधारा में विश्वास था कि देश की गरीब जनता देर सबेर अपने वोट के ताकत से एक ऐसी परिस्थिति लाएगी जहा लोकतंत्र को सफल कहा जा सकता है।क्योंकि उस समय"कटोरा सिद्धांत प्रचलित था मतलब एक गरीब देश का गरीब नागरिक लोकतंत्र से ज्यादा एक कटोरे चावल की इक्छा करता है।

प्राथमिक कठिनाईयाँ-आजादी के पश्चात भारत मे नीरक्षरता, गरीबी,जातिगत विषमता,भौगौलिक विषमता आदि प्रमुख औपनिवेशिक विरासत मे मीलि कठिनाइयो का सामना करना था।पुरुषों का वर्चस्व था।महिलाओं का पारिवारिक शोषण आम बात थी।1951 के समय मे निरक्षरता काफी ज्यादा थी पुरुषों 25% शिक्षित थे व महिलायें 7.9% शिक्षित थी।तथापि भारत निरन्तर आगे बढ़ता रहा।इंदिरा गांधी ने सन् 1971 में "गरीबी हटाओ"का नारा दिया।

राजनीतिक अस्थिरता-भारतीय व विदेशी भविष्य के कुशल वक्ताओं ने यह भविष्यवाणी की की भारत मे न तो लोकतंत्र रहेगा न भारत की एकता लम्बे तक रह पाएगी।यहा तक कि भारत अपने वर्तमान अर्थब्यवस्था को भी खो देगा।पर लंबे समय तक जब भारत अपनी धर्मनिरपेक्ष स्थिति कायम रखने में सफल रहा।जबकि इन विद्वानों के अनुसार या तो भारत कई राज्यो में बटने वाला था या एक तानाशाह के कारण इसकी एकता अक्षुण्ण रहती।कयामत के इन वक्ताओं की धारणा तब मजबूत हुई जब भारत मे आपातकाल की घोषणा हुई।इसे ये भारत के अस्थिर राजनीतिक भविष्य का प्रारम्भ मानने लगे।टाइम्स के एक संवादाता निविल मैक्सवेल ने यह घोषणा की की"भारत को लोकतांत्रिक ढांचे के अंतर्गत विकसित करने का महान प्रयास असफल हो गया है।"उन्होंने यह भविष्यवाणी की की आने वाला चौथा आम चुनाव जो उस समय होने वाला था भारत का आखिरी चुनाव होगा।

इन विचारों को 1960 में और हवा मिली थी जब भारत मे क्षेत्रीय पार्टीयो का उदय हुवा विशेषकर 1980 व 1990 में।

यह रचना है विकासशील जनता की।यह कहानी है "क्रमिक क्रांति" की।

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