क्या भारतीय लोग प्यूरिटी से ज्यादा थ्यूरिटी के प्रति आकर्षित होते हैं।

 चलिये थोड़ा अवलोकन करते है-भारत में वेदों से ज्यादा गीता लोकप्रिय है मतलब लोगो को प्यूरिटी नहीं थ्यूरिटी चाहिए।

लोग वैदिक कर्मकांडो को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग नही मानते जबकि शंकराचार्य के ज्ञान मार्ग को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मानते है।मतलब लोगो को प्यूरिटी नही थ्यूरिटी चाहिये।

प्राचीन काल से ही हम भारतीय लोगो को थ्यूरिटी में इंट्रेस्ट है।यह इंट्रेस्ट हमारे दर्शन में भी दिखाई देता है।            जबकि पश्चिम में लोगो को प्यूरिटी में इंट्रेस्ट है।जबतक यह इंट्रेस्ट बदल नही जाता तबतक हम विकासशील देश नही बन पायेंगे।आपकी क्या राय है बताये।

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भारतीय दर्शन

कृत्रिम बुध्दिमता

जीनियस के लक्षण