भारतीय दर्शन

 



भारतीय दर्शन एक धर्मप्रधान चिंतन है।चिंतन चिंता का अपररूप है।भारतीय दार्शनिको व विचारको में आदिशंकराचार्य,विवेकानंद,महर्षि दयानंद आदि का नाम प्रमुख है।प्राचीन भारतीय चिंतन जिसे वैदिक चिंतन कहा जा सकता है में भारतीय विचारों की झलक देखने को मिलती है।अद्वैत वेदांत जिसे उपनिषदो से आदिशंकराचार्य ने बटोरा है का प्राचीन भारतीय दर्शन में अतिविशिष्ट स्थान है।इसका एक वाक्य ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्यांं अति प्रचलित है।अद्वैत का सबसे अच्छा उदाहरण यह है की जड़ रस भूमि से लेता है व उपयोग फल व पत्तिया में होता है क्योंकि यह यह जगत भेद रहित है यही अद्वैत की मूल धारणा है।अद्वैत वेदांत का एक और मूल धारण यह है कि कारण ही सत्य है कार्य तो कारण का विवर्त मात्र है।अद्वैत के अनुसार जिस प्रकार आभूषण का सोने से अलग कोइ तत्वतः सत्ता नही है उसी प्रकार जगत का ब्रह्म से अलग कोई सत्ता नही है।पश्चिमी दर्शन भारतीय दर्शन के सामने बहुत छोटे  लगते है।आप खुद देख लीजिए जहा कैल न्यूपोर्ट अपनी किताब "डीप वर्क" में डीप वर्क करने के लिये ईमेंल नोटिफिकेशन वर्क करते समय न चेक करने की सलाह देते है वहीं स्वामी विवेकानंद का कथन है,"The boat may stay in water but water should not stay in boat."

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