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विज्ञान की कुछ महत्वपूर्ण परिभाषाये

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 मूलक-तत्वों के ऐसे समूह जो यौगिको में रासायनिक तत्व सा ब्यवहार करते है मूलक कहलाते हैं।मुलक कार्बनिक व अकार्बनिक दोनों तरह के हो सकते हैं। आयन-तत्वों का ऐसा समूह जिनपर धनावेश व ऋणावेश दोनों समान मात्रा में होते हैं आयन कहलाते है।जिनमे इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिक होती है प्रोटानो की अपेछा उसे ऋणायन व जिनमे प्रोटानो की संख्या इलेक्ट्रॉनों की अपेछा अधिक होती है उसे धनायन कहते है। पायस-द्रव में यदि द्रव मिला हो तो उस विलयन को पायस कहते है अर्थात पायस में द्रव ही परिक्षिप्त प्रवस्था व परिक्षेपण माध्यम दोनों होता है।  विभवांतर-दो बिन्दुवों के बीच का विभवान्तर के परिमाण का मापन एक बिंदु से एकांक आवेश दूसरे बिंदु तक ले जाने वाले कार्य से करते हैं अर्थात- विभवांतर(V)=W/Q. प्रतिरोध-विधुत धारा के प्रवाह में उत्पन्न विरोध को प्रतिरोध कहते है।इसे R से प्रदर्शित करते हैं।  

रामचरितमानस

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रामचरितमानस भगवान राम के चरित्र को शब्दों में बांधने का एक प्रयास है। रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाकाब्य है।मानस भारतिय संस्कृति का केवल दर्शन न होकर अपितु संपूर्ण मानवता के लिये एक उच्चादर्श है।मानस के लेखक के अनुसार वही कीर्ति कविता व सम्पति उत्तम है जो गंगा के समान सबका हित करने वाली हो।मानस भक्ति की गंगा है।मानस का एकाग्र अध्ययन ईस्वर स्तुति का एकमात्र स्रोत है।इसके अनुसार दया धर्म का मूल है और पाप का मूल अभिमान है।

भारतीय संविधान का विकास

 भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुवा।राष्ट्रीय आंदोलन का मुख्य योगदान संवैधानिक सुधारों सम्बधी प्रस्ताव पास करने से कहीं बढ़कर ठोस राजनीतिक अमल में रहा।संविधान का मूलाधार जनतंत्र की भावना थी।जनता में इस भावना का संचार राष्ट्रीय आंदोलन ने ही किया।इसका प्रतिबिम्ब ब्यापक जन भागीदारी में मिलता है।स्वराज ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा मुप्त भेट मे नही मिलने वाला था।यह भारत द्वारा एक आत्म घोषणा थी। क्या आप चाहते है कि मैं ज्यादा इन विषयों पर लिखू तो कमेंट करे।

भारतिय राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत

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 "आजादी के बाद का भारत"का अध्य्यन करने के लिए राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत को जानना आवश्यक है क्योकि विकास की क्रांति में स्वतंत्रता आंदोलन की जड़े गहरी हैं।1919 के बाद राष्ट्रीय आंदोलन इस विचारधारा के इर्द गिर्द रहा की राजनीति या स्वयं की मुप्ति में आम जनता को शामिल होना चाहिये वरन होना पङेगा।स्वतंत्रता आंदोलन के प्रणेता महात्मा गांधी ने जीवन भर इसी विचारधारा का प्रसार किया कि चाहे सामाजिक क्रांति हो या फिर औपनिवेशिक शासन की जड़े कमजोर करने का जन अभियान हो उसे पूरा करने में  जनता की भूमिका अहम होती हैं न्रेतीत्व की नही तथापि न्रेतीत्व की गुणवत्ता इस प्रयोजन को ,प्रभावित करती है।

भारत मे उपनिवेशवाद की भूमिका

 लम्बे समय से चली आ रही औपनिवेशिक शासन व्यवस्था भारतियो के लिए कुछ बदलाव दे गई।वो बदलाव भारत ने अग्रेजो से सीखे थे।परंतु ये सभी परिवर्तन औपनिवेशिक ढांचे के अंतर्गत हुवे थे अतः अधोगति ही इस परिवर्तन की परिणति सिद्ध हुई।औपनिवेशिक शासन ने कभी भारतीय कृषि पर ध्यान नही दिया।बचे जमीदार लोग तो उनकी मूल रुचि लगान वसूली में थी उन्होंने कभी कृषि विकास की जहमत ही नही मोल ली।भारतीय अर्थव्यवस्था के पीछणेपन का एक कारण शहरी व ग्रामीण निवासीयो के परिमाणात्मक अनुपातीक विषमता थी।

नीति

 नीति कहती है कि अगर धर्म की रक्षा के लिए झूठ बोलना अनिवार्य हो तो मनुष्य को झूठ बोल लेना चाहिए।उस समय झूठ बोलना नीति विरुद्ध नही होगा। नीति कहता है कि अगर कोई आपके शरण मे आता है तो उसे ना न करे भले ही वह आपके गुप्त बातो का पता लगाने के इरादे से ही क्यो न आया हो। छोटा भाई पुत्र के समान होता है व छोटे भाई की भार्या पुत्री के समान होती है। जब विनास का समय आता है तो बुद्धि विपरीत हो जाती है।तुलसीदास जी ने भी लिखा है, "जाको प्रभु तरुण दुःख देहि।ताकि मति पहले हर लेहि।। यदि मंत्री भय के कारण मिथ्या प्रसंशा करता हो तो समझ जाइए की राज्य का सर्वनाश होने वाला है।और यदि वैद्य भय के कारण असत्य बोल रहा है तो शरीर का नाश होना तय है।

मोक्ष

मोक्ष जीवन मरण के चक्र से मुप्ति का नाम है।क्या आप जानते है कि मोक्ष कैसे प्राप्त किया जाता है।मोक्ष प्राप्त करने के लिये भगवत गीता में तीन उपाय बताए गये है। १-ज्ञान मार्ग २-भक्ति मार्ग ३-कर्म मार्ग १-ज्ञान मार्ग-समस्त चराचर सृस्टि में एक ही इन्द्रियों मन बुद्धि से परे ब्रह्म का वास है का ज्ञान मानव को मोक्ष दिलाता है परम शांति दिलाता है।जब मानव सर्वत्र एकसा भाव मे स्थित ब्रह्म देखता है तो सब भेद नष्ट हो जाते है।तभी मानव जन्म मरण के चक्र से मुप्त हो जाता है। २-भक्ति मार्ग-अपनी समस्त कामनाओ पर को नष्ट कर केवल भगवत प्राप्ति की इक्षा करने वाला भी मोक्ष प्राप्त कर सकता है।जिस प्रकार चीनी को पानी मे घोलने पर चीनी का अस्तित्व समाप्त हो जाता है व केवल पानी बचता है।उसी प्रकार नर व नारायण के मिलन से नर का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। ३कर्म मार्ग-फल की चिंता किये बिना कर्म करने से अर्थात निष्काम कर्म करने से भी मोक्ष प्राप्त हो जाता है।

Some funny facts कुछ हास्यप्रद तथ्य

 नहाया जाता है स्वथ्य रहने के लिये पर ठंडी में नहाने से स्वास्थ्य खराब होने की सम्भावना होती है फिर भी लोग नहाते हैं।😁😁😁 लोग वाट्सएप पर ज्ञान ऐसे देते है जैसे वो पुराने जमाने के ऋषि मुनि हो।😁😁😁 अगर चाय वाला देश का देश का प्रधानमंत्री हो सकता है तो तो दूध वाले को उपप्रधानमंत्री होना चाहिए।😁😁😁😁

अध्ययन कुशलताये study skill

 पड़ने के लिये कुछ आवश्यक बिन्दुवों पर हम आपका ध्यान आकर्षित करना चाहेंगे। १-पड़ते समय फोन का नोटिफिकेशन न चेक करें। २-अध्य्यन की गुडवत्ता आपके फोकस पर निर्भर करती है।इसलिये पूरा फोकस लगा कर पढे। ३-आपको अपनी स्टडी स्किल इम्प्रूव करने के लिये एक किताब"deep work"पढ़नी चाहिए।यह काफ़ी अच्छी किताब है। ४-जब आप पढ़ने के लिए तैयार हो तो उससे पहले आप खुद को डराओ ऐसा की नही पढ़े तो फेल हो जाओगे या मम्मी पापा की डांट पड़ेगी या कुछ और सोच के अपने को डराओ ऐसा करने से आपका मस्तिष्क पूरी तरह से अवेयर हो जाएगा और जो पढ़ोगे वो आसानी से याद होगा। ५-हार्ड वर्क तो करे पर स्मार्ट वर्क जरूर करे। फिर दुहराना चाहूंगा आप deep work जरुर पढ़े।क्योकि आज के समय मे डीप वर्क दुर्लभ हो गया है।

साकारात्मक विचार

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१-जो झुक सकता है वो पुरी दुनिया झुका सकता है। २-मन अशांत है इसे वस में करना मुश्किल है पर इसे वैराग्य व निरन्तर अभ्यास से वस में किया जा सकता है। ३-आप अगर प्रशंशा के झूठ व आलोचना के सच जान सकते हो फिर आप अपने जीवन को कुछ बेहतर बना सकते हो। ४-जहा से हम हार मानकर लौट आते है वही से जीत का रास्ता प्रारम्भ होता है। ५-वही कीर्ति कविता व सम्पति उत्तम है जो गंगा के समान सबका हित करने वाली हो। ६-जो लोग आपके लिए गड्ढे खोदते है वही लोग आपको गड्ढे पार करना सिखाते है। ७-यदि सफलता एक फूल है तो विनम्रता उसकी सुगन्ध है। ८-खुद के अलावा किसी दूसरे की सरण में मत जावो-गौतम बुद्ध।

गहरे मनोवैज्ञानिक तथ्य

 जब कोई दूसरा आपको गुदगुदाएगा तो गुदगुदी होगी पर अपने हाथ से गुदगुदाने पर नही होगी क्योंकि आपके मस्तिष्क को पहले से पता है कि आप गुदगुदाने वाले हो इसलिये वह गुदगुदी सहने के लिए पहले ही तैयार रहता है। मनोवैज्ञान यह बताता है कि अधिकांश स्मार्ट लड़के सिंगल है या लव फेलियर है। किसी को ऐसे बिना नाम लिए पुकारने से अच्छा है कि उसे नाम लेकर बुलाये उसे अच्छा लगेगा। जो ब्यक्ति कम बोलता व तेज बोलता है मतलब उसका मस्तिष्क तेज है। किसी के न बुलाने पर भी अपना नाम सुनाई देना स्वस्थ मस्तिष्क की निशानी है।

चिंतन शक्ति को कैसे बढ़ाया जाय?

 सोचने की क्षमता बढ़ाना कौन नही चाहता पर इस विशष पर ईन्टरनेट पर कम ही जानकारी है तो चलिए दृष्टिपात करते है। चिंतन करने से पहले हमें यह पता होना चहिये की सोचना क्या है फिर यह पता करना चाहिए कि क्या जो हमे सोचना  है क्या उसके समरूप कोई दूसरी दूसरा धारणा प्रकृति में उपस्थित है।जैसे यदि आप अद्वैत के बारे में सोच रहे हो तो इसका प्रकृति में सबसे अच्छा उदाहरण यह है कि ऊर्जा पदार्थ में व पदार्थ ऊर्जा में परिवर्तित हो सकता है।समरूप उदाहरण देने से आपका वक्तब्य या लेख आकर्षक हो जाता है।इसे पार्श्व विचार कहते है। जब आप एक शब्द किसी को सुनाते हो तो उसे यह सामान्य लगता है पर जब आप उस शब्द के पीछे एक विशेषण लगा देते हो तो यह लोकप्रिय हो जायेगा जैसे क्रांति एक सामान्य सब्द है पर क्रमिक क्रांति उसके अपेक्षा असामान्य शब्द है।इसी प्रकार "गूढ़ ब्रह्माण्ड"ब्रह्माण्ड से ज्यादा असाधारण है।इसे विशेषण अलंकार कहा जा सकता है। जब आप एक ही बात अन्य सब्दो व वाक्यो व विचारो में दुहराते हो या अलग अलग  दृष्टिकोण से समझाते हो तो यह भी सामने वाले श्रोता को प्रभावित करता है।इसे अर्थानुप्रास अलंकार कहा जा सकता है।

कहानी गतिशील भारत की

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 14अगस्त1947 आजादी के पूर्व सन्ध्या को प०नेहरू के प्रसिद्ध भाषण में अर्जुन रूपी राष्ट्र को दीये सम्बोधन में जो उत्साह था वह दुर्लभ था न भूतो न भविष्यति।नेहरू को इस यूरोपीय विचारधारा में विश्वास था कि देश की गरीब जनता देर सबेर अपने वोट के ताकत से एक ऐसी परिस्थिति लाएगी जहा लोकतंत्र को सफल कहा जा सकता है।क्योंकि उस समय"कटोरा सिद्धांत प्रचलित था मतलब एक गरीब देश का गरीब नागरिक लोकतंत्र से ज्यादा एक कटोरे चावल की इक्छा करता है। प्राथमिक कठिनाईयाँ-आजादी के पश्चात भारत मे नीरक्षरता, गरीबी,जातिगत विषमता,भौगौलिक विषमता आदि प्रमुख औपनिवेशिक विरासत मे मीलि कठिनाइयो का सामना करना था।पुरुषों का वर्चस्व था।महिलाओं का पारिवारिक शोषण आम बात थी।1951 के समय मे निरक्षरता काफी ज्यादा थी पुरुषों 25% शिक्षित थे व महिलायें 7.9% शिक्षित थी।तथापि भारत निरन्तर आगे बढ़ता रहा।इंदिरा गांधी ने सन् 1971 में "गरीबी हटाओ"का नारा दिया। राजनीतिक अस्थिरता-भारतीय व विदेशी भविष्य के कुशल वक्ताओं ने यह भविष्यवाणी की की भारत मे न तो लोकतंत्र रहेगा न भारत की एकता लम्बे तक रह पाएगी।यहा तक कि भारत अपने वर्तमान अर

अवचेतन मन

 मानव मस्तिष्क के दो भाग है-१-अवचेतन मन,२-चेतन मन।चेतन मन हमारे दैनिक क्रियाकलापों को सुबह से शाम तक करता है जबकि अवचेतन मन सोने के बाद स्वसन आदि कामो को करता है।आपको यूट्यूब पर अवचेतन मन के बारे में लाखों वीडिओज़ मिल जाएंगे।पर समझने वाली बात यह है कि आखिर अवचेतन मन इतना प्रसिद्ध क्यो है।दरसल में बात यह है कि अवचेतन मन चेतन मन से काफी शक्तिशाली है।चेतन मन की शक्तियो का परिसर काफी विशाल है।यह ब्रह्मांड की प्रोग्रामिंग बनाने में अपना योगदान देता है।गौतम बुद्ध ने एक गहरी बात कही है कि जो आप सोचते हो वो हो जाते हो अर्थात विचार ही वस्तु में चरितार्थ होता है।जिसको आप महसूस करते हो उसे आप अकर्षित करते हो।जिसकी आप कल्पना करते हो उसका आप निर्माण करते हो।अब जो भगवान बुद्ध के बात पर विस्वास ना करे उसे मूर्ख न कहे तो क्या कहे।मेरा प्रयोजन आपको काल्पनिक दुनिया मे ले जाने का नही था परन्तु यह साइंटिफिकली प्रूफ है कि हमारा मस्तिष्क जिसकी चाहे उसकी रचना कर सकता है।पर आप पुछोगे इसका उपयोग क्या है तो आप अपने अवचेतन मन की शक्तियों का यूज ईस प्रकार कर सकते हो कि आप अपने लक्ष्य को बार बार फील करो वो आपके प्र

क्या भारतीय लोग प्यूरिटी से ज्यादा थ्यूरिटी के प्रति आकर्षित होते हैं।

 चलिये थोड़ा अवलोकन करते है-भारत में वेदों से ज्यादा गीता लोकप्रिय है मतलब लोगो को प्यूरिटी नहीं थ्यूरिटी चाहिए। लोग वैदिक कर्मकांडो को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग नही मानते जबकि शंकराचार्य के ज्ञान मार्ग को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मानते है।मतलब लोगो को प्यूरिटी नही थ्यूरिटी चाहिये। प्राचीन काल से ही हम भारतीय लोगो को थ्यूरिटी में इंट्रेस्ट है।यह इंट्रेस्ट हमारे दर्शन में भी दिखाई देता है।            जबकि पश्चिम में लोगो को प्यूरिटी में इंट्रेस्ट है।जबतक यह इंट्रेस्ट बदल नही जाता तबतक हम विकासशील देश नही बन पायेंगे।आपकी क्या राय है बताये।

उपनिषदो की याद रखने योग्य बातें

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मैं उन महान आत्माओ को जानता हूं जो अँधेर से परे सूरज के तरह दीप्तिमान हैं।केवल अपने आप को जानने से ही कोई ब्यक्ति मृत्यु के परे जा सकता है।  जो यह जान लेता है कि इश्वर सर्वशक्तिमान आत्मा, समस्त चराचर ब्रह्माण्ड का रचयिता है वह मृत्यु के परे जा सकता है। ब्रह्म ही इस अस्तित्वमान जगत का अभिभावक व समस्त गूढ़ ब्रह्माण्ड का मालिक है।इस प्रकार उपनिषदो का प्रारम्भ ब्रह्मतत्त्व के प्रतिपादन से होता है।

भारतीय दर्शन

  भारतीय दर्शन एक धर्मप्रधान चिंतन है।चिंतन चिंता का अपररूप है।भारतीय दार्शनिको व विचारको में आदिशंकराचार्य,विवेकानंद,महर्षि दयानंद आदि का नाम प्रमुख है।प्राचीन भारतीय चिंतन जिसे वैदिक चिंतन कहा जा सकता है में भारतीय विचारों की झलक देखने को मिलती है।अद्वैत वेदांत जिसे उपनिषदो से आदिशंकराचार्य ने बटोरा है का प्राचीन भारतीय दर्शन में अतिविशिष्ट स्थान है।इसका एक वाक्य ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्यांं अति प्रचलित है।अद्वैत का सबसे अच्छा उदाहरण यह है की जड़ रस भूमि से लेता है व उपयोग फल व पत्तिया में होता है क्योंकि यह यह जगत भेद रहित है यही अद्वैत की मूल धारणा है।अद्वैत वेदांत का एक और मूल धारण यह है कि कारण ही सत्य है कार्य तो कारण का विवर्त मात्र है।अद्वैत के अनुसार जिस प्रकार आभूषण का सोने से अलग कोइ तत्वतः सत्ता नही है उसी प्रकार जगत का ब्रह्म से अलग कोई सत्ता नही है।पश्चिमी दर्शन भारतीय दर्शन के सामने बहुत छोटे  लगते है।आप खुद देख लीजिए जहा कैल न्यूपोर्ट अपनी किताब "डीप वर्क" में डीप वर्क करने के लिये ईमेंल नोटिफिकेशन वर्क करते समय न चेक करने की सलाह देते है वहीं स्वामी विवेकानंद का

कृत्रिम बुध्दिमता

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मानव अब सोच विचार करने का काम भी कंप्यूटर से करना चाह रहा है।कृत्रिम बुध्दिमता के पिछे काफी रीसर्च हुए है।सामने दिखने वाले भौतिक तथ्यों से सीखना व एक तथ्य से दूसरे तथ्य की कल्पना करना कृत्रिम बुद्धिमता के अंतर्गत आता है।कृत्रिम बुद्धिमता एक ऐसा विषय है जिसके बारे में जितना रिसर्च हो कम है।इस क्षेत्र में रीसर्च कर नोबल पुरस्कार प्राप्त करने के अनंत सम्भावनाये है।कृत्रिम बुद्धिमता धारी रोबोट्स यदि मानव को अपना शत्रु समझने लगे तो ये मानव के लिए खतरा सिद्ध हो सकता है।रोबोट्स एक ऐसी मानवीय कल्पना है जो चरितार्थ हो रही है।रोबोट्स में यदि एक विचार को समझकर अन्य सिमिलर विचार सोचने की क्षमता विकसित भी की जाय तो भी ये मानव मस्तिष्क के तरह काम नही कर सकता उदाहरणतः जब ये खाना पकाते देखेगा तो यह खाने वाला हर चीज़ पकाएग। मानव को खाते देख यह भी खाना शुरू कर देगा।तथापि हो सकता है कि मानव भविष्य में एक पूर्ण यांत्रिक मानव बनाने मे सफल हो जाय।

जीनियस के लक्षण

 रात में जागना-जब सब लोग सो रहे होते है तब जीनियस का दिमाग कुछ न कुछ सोच रहा होता है इसी कारण वह रात तक जागता रहता है। अपने से बड़े उम्र के लोगो से दोस्ती-जीनियस अपने से बड़े लोगो से इसलिये दोस्ती करता है ताकि उसे बड़े लोगो का अनुभव प्राप्त हो। सीसे में देखकर अपने आप से बात करना-जीनियस अक्सर ऐसा करते है लोग उसे पागलपन की निशानी मानते है पर ये जीनियस की निशानी है। कम मित्र होना-समय बर्बाद न हो इसलिये ये कम मित्र रखते है।उस समय मे वो कुछ नया करते हैं। एक ही ड्रेश में रहना-ये लोग अपना कीमती समय इन चीजों में बर्बाद नहीं किया करते। शर्मिला होंना-जीनियस अधिकतर शर्मिले होते है। कमरे में सामान इधर-उधर होना इत्यादि। जिनीयस ज्यादातर भुलक्कड़ होते है।